पौधो को बारिश मे क्या और कैसे दे fertilizer?

 वर्षा ऋतु के मौसम में अनुमोदित पोषक तत्व प्राप्त करने की प्रक्रिया में कुछ विशेष तकनीकों और सावधानियों की मांग की जाती है ताकि पौधो को आवश्यक पोषक तत्व मिल सकें और साथ ही उनकी सेहत भी बनी रहे। बारिश के मौसम में पौधों को खाद देना एक महत्वपूर्ण कार्य है, जो पौधों की सेहत और उत्पादन को बढ़ाने में सहायक होता है  

बारिश के मौसम में पौधो को खाद कैसे दी जाए?    और किन बातों का ध्यान रखा जाए?


 बारिश में खाद की जरूरत


 वर्षा ऋतु के मौसम में पौधो को पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है क्योंकि इस समय उनके विकास की दर बढ़ जाती है।  इस समय मिट्टी में नमी बनी रहती है, जिससे अधिक पोषक तत्त्वों का प्रयोग किया जाता है।  लेकिन साथ ही, मिट्टी की उर्वरकता कम हो सकती है।


 खाद बनाने की विधियाँ


 वर्षा ऋतु के लिए विभिन्न प्रकार की विधियां अपनाई जा सकती हैं, जिनमें जैविक और अजैविक खाद्य पदार्थों का उपयोग शामिल है।


 जैविक खाद

 1.कम्पोस्ट : 

 पोषक तत्त्व देने के लिए कम्पोस्ट का उपयोग बहुत ही जादुई होता है।  इसमें मिट्टी मिलाने से मिट्टी की संरचना सुदृढ होती है और जल धारण क्षमता बहुतायत होती है।  बारिश के मौसम में कम्पोस्ट को मिट्टी की ऊपरी सतह पर फैला देना चाहिए ताकि यह धीरे-धीरे मिट्टी में मिल सके।


 2.वर्मी कम्पोस्ट : 

 वर्मी कम्पोस्ट भी एक उत्कृष्ट जैविक खाद है।  इसे सीधे प्रमाणित के चारों ओर डाला जा सकता है।  यह मिट्टी की संरचना को उपकरणों और पौधो को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करने में सहायक होता है।


 3.गोबर की खाद : 

 गोबर की खाद का उपयोग भी किया जा सकता है।  इसमें मिट्टी मिलाने से इलेक्ट्रोलाइट्स, स्टोन्स और मोर्टार जैसे महत्वपूर्ण तत्व मिलते हैं।


 अजैविक खाद

 1.नाइट्रोजन उर्वरक: 

 नाइट्रोजन उर्वरक का उपयोग करने के लिए पौधो की वृद्धि आवश्यक है। यूरिया एक प्रमुख नाइट्रोजन उर्वरक है जिसे बारिश के मौसम में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे चारों ओर से छिडकावं किया जाना चाहिए ताकि यह बारिश के पानी के साथ घुलकर मिट्टी में समा जाए।


 2.फॉस्फोरस उर्वरक : 

 फॉस्फोरस पौधों की जड़ विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है। डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) एक प्रमुख फॉस्फोरस उर्वरक है। इसे मिट्टी में मिलाने से पौधों को आवश्यक फॉस्फोरस मिलता है।


3.पोटाश उर्वरक :

 पोटाश पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और फूल-फलों की गुणवत्ता सुधारने में सहायक होता है। एमओपी (म्यूरेट ऑफ पोटाश) का उपयोग किया जा सकता है।


खाद देने की विधि और समय


खाद देने का समय 


 बारिश के मौसम में खाद देने के समय और विधि का चयन बहुत महत्वपूर्ण होता है। 


1.बारिश से पहले : 

 अगर संभव हो तो खाद को बारिश से पहले मिट्टी में मिलाना चाहिए। इससे खाद अच्छी तरह से मिट्टी में मिल जाती है और पौधे इसे आसानी से अवशोषित कर सकते हैं।


2.भारी बारिश के बाद :  

 भारी बारिश के बाद जब मिट्टी अधिक गीली हो जाए तो खाद देने से बचना चाहिए क्योंकि इससे खाद बह सकती है।


खाद देने की विधि


1.बैंडिंग : 

 इस विधि में खाद को पौधों की कतारों के दोनों ओर डालते हैं। इससे पौधे आसानी से खाद को अवशोषित कर सकते हैं।


2.फोलियर स्प्रे : 

 यह विधि पौधों के पत्तों पर खाद के घोल का छिड़काव करके की जाती है। यह विधि विशेष रूप से ट्रेस एलिमेंट्स के लिए उपयोगी होती है।


सावधानियाँ


1.मात्रा का ध्यान: 

 खाद की मात्रा का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है। अत्यधिक मात्रा में खाद देने से पौधों को नुकसान हो सकता है।


2.संतुलित उर्वरक : 

 संतुलित उर्वरक का उपयोग करना चाहिए ताकि पौधों को सभी आवश्यक पोषक तत्व मिल सकें।


3.मिट्टी की जाँच : 

 खाद देने से पहले मिट्टी की जाँच कर लेनी चाहिए ताकि पता चल सके कि कौन से पोषक तत्वों की कमी है।


4.पानी का निकास :

 पौधों के आसपास पानी का सही निकास होना चाहिए ताकि अधिक पानी न रुके और जड़ों को नुकसान न हो।


निष्कर्ष

बारिश के मौसम में पौधों को खाद देना एक महत्वपूर्ण कार्य है, जो पौधों की सेहत और उत्पादन को बढ़ाने में सहायक होता है जैविक और अजैविक खादों का सही समय और विधि से उपयोग करना चाहिए ताकि पौधों को आवश्यक पोषक तत्व मिल सकें। साथ ही, खाद देने में सावधानियाँ बरतनी चाहिए ताकि पौधों को कोई नुकसान न हो। इस प्रकार, उचित देखभाल और खाद देने से पौधे स्वस्थ और सुदृढ़ बनते हैं, जो अधिक फुल और बेहतर गुणवत्ता वाले फल और सब्जीया प्रदान करते हैं।

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